लेबनान के प्रधानमंत्री ने अपनी पूरी कैबिनेट के साथ दिया इस्तीफा

बेरुत / नई दिल्ली ( omtimes ) लेबनान की राजधानी बेरुत में शक्तिशाली धमाके के बाद लोगों की मांग के आगे झुकते हुए प्रधानमंत्री हसन दियाब ने इस्तीफा दे दिया है। विस्‍फोट से नाराज लोग सरकारी महकमे की लापरवाही और सरकार की अयोग्यता के आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतर आए थे और पूरी सरकार से त्यागपत्र की मांग कर रहे थे। यही नहीं जनता के भारी आक्रोश के चलते एक-एक करके मंत्रियों ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया था। देश में भारी जनाक्रोश के चलते सरकार काफी दबाव में थी। 
टेलीविजन पर प्रसारित अपने संदेश में दियाब ने कहा कि वे आम लेबनानी लोगों की इस मांग का समर्थन करते हैं कि इस अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाए। सोमवार को कैबिनेट की बैठक के बाद दियाब ने प्रधानमंत्री पद से अपने त्यागपत्र की घोषणा की। लेबनान के राष्‍ट्रपति माइकल आउन ने प्रधानमंत्री समेत पूरी सरकार का इस्‍तीफा स्‍वीकार कर लिया है। हालांकि राष्‍ट्रपति ने हसन दियाब से नई सरकार के गठन तक पद पर बने रहने को कहा है। 
इसी साल जनवरी में गठित मंत्रिमंडल को ईरान समर्थित शक्तिशाली हिजबुल्ला समूह और उसके सहयोगियों का समर्थन हासिल था। बता दें कि बेरुत में बीते मंगलवार को बंदरगाह पर स्‍टोर करके रखे गए दो हजार टन अमोनियम नाइट्रेट में विस्‍फोट हो गया था। इस धमाके में अब तक 163 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 6,000 से ज्‍यादा लोग घायल हुए हैं। बताया जाता है कि अभी भी सैकड़ों लोग लापता हैं ज‍िनकी तलाश जारी है। 

इससे पहले हिंसक प्रदर्शनों के बीच दो और मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। सूचना मंत्री मनल अब्दल समद और पर्यावरण मंत्री दामियनोस कत्तर ने रविवार को ही अपना पद छोड़ दिया था। सोमवार को न्याय मंत्री मैरी क्लाउड नजम और वित्त मंत्री गाजी वजनी ने भी इस्तीफा दे दिया। दुनिया के दानदाता देशों और संस्थाओं ने लेबनान के लिए अपनी झोली खोल दी है, लेकिन वे राजनीतिक व आर्थिक सुधारों की शर्त भी रख रहे थे।
मंत्रियों के इस्तीफे पर प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दो-चार इस्तीफों से कुछ नहीं होगा। पूरी सरकार का इस्तीफा होना चाहिए क्योंकि यह संकट से नहीं उबार सकती। इससे पहले प्रधानमंत्री हसन दियाब ने जल्द चुनाव कराने का आश्वासन देकर लोगों को शांत करने का प्रयास किया था।

इस बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि हिंसा और अराजकता की जीत नहीं होनी चाहिए। चार अगस्त की घटना वज्रपात जैसी थी। यह सचेत होने और कदम उठाने का वक्त है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका देश मदद में पीछे नहीं रहेगा। कांफ्रेंस में जॉर्डन, मिस्त्र, चीन, यूरोपियन यूनियन और कई अरब देशों ने भी भाग लिया। वहीं, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से लेबनान पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग की है।
चार अगस्त के बेरुत धमाके में 160 साल पुराना ऐतिहासिक सुरसॉक पैलेस भी नष्ट हो गया। सुरसॉक पैलेस के मालिक रोड्रिक सुरसॉक ने कहा कि एक पल में सब खत्म हो गया। 1975-1990 के गृहयुद्ध के बाद सुरसॉक पैलेस का पुराना गौरव लौटाने के लिए बड़े ध्यान से इसकी मरम्मत कराई गई थी। इसमें 20 साल का वक्त लगा था।
भारत शीघ्र ही लेबनान की मदद के लिए और दवा, खाने का सामान तथा आवश्यक सामग्री भेजेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने भारत सरकार की ओर से चार अगस्त की घटना पर शोक जताया। तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत ने हाल ही में लेबनान को कोविड-19 से लड़ने के लिए चिकित्सा सामग्री भेजी थीं। हम तत्काल और राहत सामग्री भेज रहे हैं।
लेबनान की मदद के लिए दुनिया ने अपनी झोली खोल दी है। वैश्विक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने 298 मिलियन डॉलर (करीब 2,231 करोड़ रुपये) की आपात मानवीय सहायता का भरोसा दिलाया है। यहां एक शर्त भी है। पैसे तभी मिलेंगे, जब लेबनान सरकार राजनीतिक और आर्थिक सुधारों का वादा करे। यह लेबनानी जनता की बड़ी मांग है। फ्रांस के फोर्ट ब्रेगनॉन में रविवार को आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में 30 भागीदार थे। इसमें बेरुत धमाके की स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच के लिए भी मदद का प्रस्ताव किया गया। लेबनानी जनता की यह एक प्रमुख मांग है।

लेखक: OM TIMES News Paper India

(Regd. & App. by- Govt. of India ) प्रधान सम्पादक रामदेव द्विवेदी 📲 9453706435 🇮🇳 ऊँ टाइम्स

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