चीनी सैनिक धारदार हथियार लेकर आए थे भारतीय चौकी के पास, खतरनाक थे उनके इरादे

नई दिल्ली (ऊँ टाइम्स)  पूर्वी लद्दाख में विगत दिवस गलवान घाटी जैसे कहानी को दोहराने की चीन की कोशिशों को भातीय सैनिकों ने नाकाम कर दिया था। रेजांग ला के उत्तर स्थित मुखपुरी में धारदार हथियारों से लैस करीब 50 चीनी सैनिकों ने भारतीय इलाके में चोटी पर कब्जा करने की कोशिश की थी, जिस पर भारतीय सैनिकों ने हवा में फायरिंग कर उन्हें आगाह करने के बाद उन्‍हें वापस लौटने को मजबूर कर दिया। इस बारे में चीन ने फिर झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा था कि उसके सैनिक बातचीत के लिए गए थे और भारतीय सैनिकों ने उकसावे की कार्रवाई की है। वहीं दूसरी तरफ अब ऐसी तस्वीरें आई हैं जो न केवल चीन के झूठ का पर्दा उठाती हैं बल्कि उनके खतरनाक मंसूबों का इजहार करती है। 
सोमवार को जारी की गई तस्वीरों में दिख रहा है कि सोमवार को करीब 50 चीनी सैनिक हथियारों से लैस होकर रेजांग ला के पास उन चोटियों पर आने की कोशिश कर थे, जिन पर भारतीय सैनिक तैनात हैं। तस्‍वीरों में दिखाई दे रहा है कि चीनी सैनिकों के पास धारदार हथियार है। वे भारतीय सैनिकों से महज 200 मीटर की दूरी पर हैं। 14-15 जून को गलवान घाटी में जिस तरह उन्होंने भारतीय सैनिकों पर धारदार हथियारों और कील लगे डंडों से हमला किया था, वैसे ही कहानी दोहराने के लिए वे तैयारी के साथ आए थे। चीनी सैनिक भारतीय चोटियों पर कब्जे की फिराक में थे। ये चोटियां रणनीतिक स्‍तर पर काफी अहम मानी जाती हैं। चीनी सैनिकों ने 10-15 राउंड फायरिंग भी की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया। 45 साल बाद वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गोली चली थी। 
चीन के सैनिकों के पास जो हथियार दिखाई दे रहा है, उसे गुआंडाओ कहा जाता है। उनका इस्तेमाल आम तौर पर चीनी मार्शल आर्ट में किया जाता है। इसमें एक 5-6 फीट लंबे पोल पर ब्लेड लगी होती है। यह ब्लेड एक तरफ पीछे की तरफ भी मुड़ी होती है। यह भारतीय हथियार बर्छी से मिलता जुलता है। इसे बर्छी और भाले का संयुक्त रूप कहा जा सकता है।.
पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पिछले तीन दिनों से चीनी सेना भारत की फॉरवर्ड पोजिशन के नजदीक आने की कोशिश कर रही है। अभी भी रेजांग ला के पास की चोटियों के करीब भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। मौके पर तनाव चरम पर है। भारतीय सैनिक पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार है।
सोमवार देर रात दोनों देशों के बीच 45 साल बाद फायरिंग की घटना हुई। पिछली बार 1975 में गोलियां चली थीं। उस समय अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में असम राइफल्स के जवानों की पेट्रोलिंग टीम पर हमला हुआ था, जिसमें कई जवान शहीद हुए थे। 1993 में भारत और चीन के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें सहमति बनी थी दोनों देश सीमा पर फायरिंग नहीं करेंगे। इसी समझौते के चलते 15 जून को गलवन घाटी में हिंसक झड़प के बावजूद गोली नहीं चली थी।

लेखक: OM TIMES News Paper India

(Regd. & App. by- Govt. of India ) प्रधान सम्पादक रामदेव द्विवेदी 📲 9453706435 🇮🇳 ऊँ टाइम्स

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